श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

त्वमस्य लोकस्य विभो रिरक्षिषु-

र्गृहेऽवतीर्णोऽसि ममाखिलेश्‍वर।

राजन्यसंज्ञासुरकोटियूथपै-

र्निर्व्यूह्यमाना निहनिष्यसे चमूः॥ २१

tvamasya lokasya vibho rirakṣiṣu-

rgṛhe'vatīrṇo'si mamākhileśvara|

rājanyasaṃjñāsurakoṭiyūthapai-

rnirvyūhyamānā nihaniṣyase camūḥ|| 21

अर्थ

प्रभो! आप सर्वशक्तिमान् और सबके स्वामी हैं। इस संसारकी रक्षाके लिये ही आपने मेरे घर अवतार लिया है। आजकल कोटि-कोटि असुर सेनापतियोंने राजाका नाम धारण कर रखा है और अपने अधीन बड़ी-बड़ी सेनाएँ कर रखी हैं। आप उन सबका संहार करेंगे॥ २१॥

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