श्रीभगवान्ने कहा—देवि! स्वायम्भुव मन्वन्तरमें जब तुम्हारा पहला जन्म हुआ था, उस समय तुम्हारा नाम था पृश्नि और ये वसुदेव सुतपा नामके प्रजापति थे। तुम दोनोंके हृदय बड़े ही शुद्ध थे॥ ३२॥
त्वमेव पूर्वसर्गेऽभूः पृश्निः स्वायम्भुवे सति।
तदायं सुतपा नाम प्रजापतिरकल्मषः॥ ३२
श्रीभगवान्ने कहा—देवि! स्वायम्भुव मन्वन्तरमें जब तुम्हारा पहला जन्म हुआ था, उस समय तुम्हारा नाम था पृश्नि और ये वसुदेव सुतपा नामके प्रजापति थे। तुम दोनोंके हृदय बड़े ही शुद्ध थे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.3.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 142) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/3/32/