श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अजुष्टग्राम्यविषयावनपत्यौ च दम्पती।

न वव्राथेऽपवर्गं मे मोहितौ मम मायया॥ ३९

ajuṣṭagrāmyaviṣayāvanapatyau ca dampatī|

na vavrāthe'pavargaṃ me mohitau mama māyayā|| 39

अर्थ

उस समयतक विषय-भोगोंसे तुम लोगोंका कोई सम्बन्ध नहीं हुआ था। तुम्हारे कोई सन्तान भी न थी। इसलिये मेरी मायासे मोहित होकर तुम दोनोंने मुझसे मोक्ष नहीं माँगा॥ ३९॥

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