कोई गोपी श्रीकृष्ण बनकर कहती—‘अरे व्रजवासियो! तुम आँधी-पानीसे मत डरो। मैंने उससे बचनेका उपाय निकाल लिया है।’ ऐसा कहकर गोवर्धन-धारणका अनुकरण करती हुई वह अपनी ओढ़नी उठाकर ऊपर तान लेती॥ २०॥✎ 1431
मा भैष्ट वातवर्षाभ्यां तत्त्राणं विहितं मया।
इत्युक्त्वैकेन हस्तेन यतन्त्युन्निदधेऽम्बरम्॥ २०
कोई गोपी श्रीकृष्ण बनकर कहती—‘अरे व्रजवासियो! तुम आँधी-पानीसे मत डरो। मैंने उससे बचनेका उपाय निकाल लिया है।’ ऐसा कहकर गोवर्धन-धारणका अनुकरण करती हुई वह अपनी ओढ़नी उठाकर ऊपर तान लेती॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.30.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 319) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/30/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)