एक गोपी यशोदा बनी और दूसरी बनी श्रीकृष्ण। यशोदाने फूलोंकी मालासे श्रीकृष्णको ऊखलमें बाँध दिया। अब वह श्रीकृष्ण बनी हुई सुन्दरी गोपी हाथोंसे मुँह ढँककर भयकी नकल करने लगी॥ २३॥✎ 1431
बद्धान्यया स्रजा काचित्तन्वी तत्र उलूखले।
भीता सुदृक् पिधायास्यं भेजे भीतिविडम्बनम्॥ २३
एक गोपी यशोदा बनी और दूसरी बनी श्रीकृष्ण। यशोदाने फूलोंकी मालासे श्रीकृष्णको ऊखलमें बाँध दिया। अब वह श्रीकृष्ण बनी हुई सुन्दरी गोपी हाथोंसे मुँह ढँककर भयकी नकल करने लगी॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.30.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 320) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/30/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)