श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

कस्याः पदानि चैतानि याताया नन्दसूनुना।

अंसन्यस्तप्रकोष्ठायाः करेणोः करिणा यथा॥ २७

kasyāḥ padāni caitāni yātāyā nandasūnunā|

aṃsanyastaprakoṣṭhāyāḥ kareṇoḥ kariṇā yathā|| 27

अर्थ

‘जैसे हथिनी अपने प्रियतम गजराजके साथ गयी हो, वैसे ही नन्दनन्दन श्यामसुन्दरके साथ उनके कंधेपर हाथ रखकर चलनेवाली किस बड़भागिनीके ये चरणचिह्न हैं?॥ २७॥

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