भगवान् श्रीकृष्णकी प्रेयसी और सेविका गोपियाँ एक-दूसरेकी बाँह-में-बाँह डाले खड़ी थीं। उन स्त्रीरत्नोंके साथ यमुनाजीके पुलिनपर भगवान्ने अपनी रसमयी रासक्रीड़ा प्रारम्भ की॥ २॥✎ 2090
तत्रारभत गोविन्दो रासक्रीडामनुव्रतैः।
स्त्रीरत्नैरन्वितः प्रीतैरन्योन्याबद्धबाहुभिः॥ २
भगवान् श्रीकृष्णकी प्रेयसी और सेविका गोपियाँ एक-दूसरेकी बाँह-में-बाँह डाले खड़ी थीं। उन स्त्रीरत्नोंके साथ यमुनाजीके पुलिनपर भगवान्ने अपनी रसमयी रासक्रीड़ा प्रारम्भ की॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 331) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)