जब बहुत देरतक गान और नृत्य आदि विहार करनेके कारण गोपियाँ थक गयीं, तब करुणामय भगवान् श्रीकृष्णने बड़े प्रेमसे स्वयं अपने सुखद करकमलोंके द्वारा उनके मुँह पोंछे॥ २१॥✎ 1669
तासामतिविहारेण श्रान्तानां वदनानि सः।
प्रामृजत् करुणः प्रेम्णा शन्तमेनाङ्ग पाणिना॥ २१
जब बहुत देरतक गान और नृत्य आदि विहार करनेके कारण गोपियाँ थक गयीं, तब करुणामय भगवान् श्रीकृष्णने बड़े प्रेमसे स्वयं अपने सुखद करकमलोंके द्वारा उनके मुँह पोंछे॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 334) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)