॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.33.36
गोपीनां तत्पतीनां च सर्वेषामेव देहिनाम्।
योऽन्तश्चरति सोऽध्यक्षः क्रीडनेनेह देहभाक्॥ ३६
gopīnāṃ tatpatīnāṃ ca sarveṣāmeva dehinām|
yo'ntaścarati so'dhyakṣaḥ krīḍaneneha dehabhāk|| 36
अर्थ
गोपियोंके, उनके पतियोंके और सम्पूर्ण शरीरधारियोंके अन्तःकरणोंमें जो आत्मारूपसे विराजमान हैं, जो सबके साक्षी और परमपति हैं, वही तो अपना दिव्य-चिन्मय श्रीविग्रह प्रकट करके यह लीला कर रहे हैं॥ ३६॥