श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

एवमादिश्य चाक्रूरं मन्त्रिणश्‍च विसृज्य सः।

प्रविवेश गृहं कंसस्तथाक्रूरः स्वमालयम्॥ ४०

evamādiśya cākrūraṃ mantriṇaśca visṛjya saḥ|

praviveśa gṛhaṃ kaṃsastathākrūraḥ svamālayam|| 40

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—कंसने मन्त्रियों और अक्रूरजीको इस प्रकारकी आज्ञा देकर सबको विदा कर दिया। तदनन्तर वह अपने महलमें चला गया और अक्रूरजी अपने घर लौट आये॥ ४०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे
पूर्वार्धेऽक्रूरसंप्रेषणं नाम षट्त्रिंशोऽध्यायः॥ ३६॥

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