देख, तुझ-जैसे दुरात्मा दुष्टोंके बलका घमंड चूर-चूर कर देनेवाला यह मैं हूँ।’ इस प्रकार ललकारकर भगवान्ने ताल ठोंकी और उसे क्रोधित करनेके लिये वे अपने एक सखाके गलेमें बाँह डालकर खड़े हो गये। भगवान् श्रीकृष्णकी इस चुनौतीसे वह क्रोधके मारे तिलमिला उठा और अपने खुरोंसे बड़े जोरसे धरती खोदता हुआ श्रीकृष्णकी ओर झपटा। उस समय उसकी उठायी हुई पूँछके धक्केसे आकाशके बादल तितर-बितर होने लगे॥ ८-९॥
यह अर्थ श्लोक 8–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
बलदर्पहाहं दुष्टानां त्वद्विधानां दुरात्मनाम्।
इत्यास्फोट्याच्युतोऽरिष्टं तलशब्देन कोपयन्॥ ८
देख, तुझ-जैसे दुरात्मा दुष्टोंके बलका घमंड चूर-चूर कर देनेवाला यह मैं हूँ।’ इस प्रकार ललकारकर भगवान्ने ताल ठोंकी और उसे क्रोधित करनेके लिये वे अपने एक सखाके गलेमें बाँह डालकर खड़े हो गये। भगवान् श्रीकृष्णकी इस चुनौतीसे वह क्रोधके मारे तिलमिला उठा और अपने खुरोंसे बड़े जोरसे धरती खोदता हुआ श्रीकृष्णकी ओर झपटा। उस समय उसकी उठायी हुई पूँछके धक्केसे आकाशके बादल तितर-बितर होने लगे॥ ८-९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 357) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/36/8/