dantavaktrasya nidhanaṃ caidyasya ca mahākratau|| 20
अर्थ
इसके पश्चात् आप पौण्ड्रक—मिथ्यावासुदेवका वध करेंगे। काशीपुरीको जला देंगे। युधिष्ठिरके राजसूय-यज्ञमें चेदिराज शिशुपालको और वहाँसे लौटते समय उसके मौसेरे भाई दन्तवक्त्रको नष्ट करेंगे॥ २०॥
पौण्ड्रकस्य वधं पश्चात् काशिपुर्याश्च दीपनम्।
दन्तवक्त्रस्य निधनं चैद्यस्य च महाक्रतौ॥ २०
इसके पश्चात् आप पौण्ड्रक—मिथ्यावासुदेवका वध करेंगे। काशीपुरीको जला देंगे। युधिष्ठिरके राजसूय-यज्ञमें चेदिराज शिशुपालको और वहाँसे लौटते समय उसके मौसेरे भाई दन्तवक्त्रको नष्ट करेंगे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.37.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 364) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/37/20/