श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.37.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 37 · अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायः

तं निगृह्याच्युतो दोर्भ्यां पातयित्वा महीतले।

पश्यतां दिवि देवानां पशुमारममारयत्॥ ३३

taṃ nigṛhyācyuto dorbhyāṃ pātayitvā mahītale|

paśyatāṃ divi devānāṃ paśumāramamārayat|| 33

अर्थ

तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने दोनों हाथोंसे जकड़कर उसे भूमिपर गिरा दिया और पशुकी भाँति गला घोंटकर मार डाला। देवतालोग विमानोंपर चढ़कर उनकी यह लीला देख रहे थे॥ ३३॥

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