॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.38.29
किशोरौ श्यामलश्वेतौ श्रीनिकेतौ बृहद्भुजौ।
सुमुखौ सुन्दरवरौ बालद्विरदविक्रमौ॥ २९
kiśorau śyāmalaśvetau śrīniketau bṛhadbhujau|
sumukhau sundaravarau bāladviradavikramau|| 29
अर्थ
उन्होंने अभी किशोर-अवस्थामें प्रवेश ही किया था। वे दोनों गौर-श्याम निखिल सौन्दर्यकी खान थे। घुटनोंका स्पर्श करनेवाली लंबी-लंबी भुजाएँ, सुन्दर बदन, परम मनोहर और गजशावकके समान ललित चाल थी॥ २९॥