श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

सायंतनाशनं कृत्वा भगवान् देवकीसुतः।

सुहृत्सु वृत्तं कंसस्य पप्रच्छान्यच्चिकीर्षितम्॥ ३

sāyaṃtanāśanaṃ kṛtvā bhagavān devakīsutaḥ|

suhṛtsu vṛttaṃ kaṃsasya papracchānyaccikīrṣitam|| 3

अर्थ

देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णने सायंकालका भोजन करनेके बाद अक्रूरजीके पास जाकर अपने स्वजन-सम्बन्धियोंके साथ कंसके व्यवहार और उसके अगले कार्यक्रमके सम्बन्धमें पूछा॥ ३॥

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