बाँहें घुटनोंतक लंबी और हृष्ट-पुष्ट हैं। कंधे ऊँचे और वक्षःस्थल लक्ष्मीजीका आश्रय-स्थान है। शंखके समान उतार-चढ़ाववाला सुडौल गला, गहरी नाभि और त्रिवलीयुक्त उदर पीपलके पत्तेके समान शोभायमान है॥ ४८॥✎ 14331434
प्रलम्बपीवरभुजं तुंगांसोरःस्थलश्रियम्।
कम्बुकण्ठं निम्ननाभिं वलिमत्पल्लवोदरम्॥ ४८
बाँहें घुटनोंतक लंबी और हृष्ट-पुष्ट हैं। कंधे ऊँचे और वक्षःस्थल लक्ष्मीजीका आश्रय-स्थान है। शंखके समान उतार-चढ़ाववाला सुडौल गला, गहरी नाभि और त्रिवलीयुक्त उदर पीपलके पत्तेके समान शोभायमान है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.39.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 380) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/39/48/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1433 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृद) → ब्रह्मह्रद)