॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.40.8
त्वामेवान्ये शिवोक्तेन मार्गेण शिवरूपिणम्।
बह्वाचार्यविभेदेन भगवन् समुपासते॥ ८
tvāmevānye śivoktena mārgeṇa śivarūpiṇam|
bahvācāryavibhedena bhagavan samupāsate|| 8
अर्थ
भगवन्! दूसरे लोग शिवजीके द्वारा बतलाये हुए मार्गसे, जिसके आचार्य भेदसे अनेक अवान्तर भेद भी हैं, शिवस्वरूप आपकी ही पूजा करते हैं॥ ८॥