श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

आगच्छ याम गेहान् नः सनाथान् कुर्वधोक्षज।

सहाग्रजः सगोपालैः सुहृद्भिश्‍च सुहृत्तम॥ १२

āgaccha yāma gehān naḥ sanāthān kurvadhokṣaja|

sahāgrajaḥ sagopālaiḥ suhṛdbhiśca suhṛttama|| 12

अर्थ

भगवन्! आइये, चलें। मेरे परम हितैषी और सच्चे सुहृद् भगवन्! आप बलरामजी, ग्वालबालों तथा नन्दरायजी आदि आत्मीयोंके साथ चलकर हमारा घर सनाथ कीजिये॥ १२॥✎ 2101

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2101 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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