भगवन्! आइये, चलें। मेरे परम हितैषी और सच्चे सुहृद् भगवन्! आप बलरामजी, ग्वालबालों तथा नन्दरायजी आदि आत्मीयोंके साथ चलकर हमारा घर सनाथ कीजिये॥ १२॥✎ 2101
आगच्छ याम गेहान् नः सनाथान् कुर्वधोक्षज।
सहाग्रजः सगोपालैः सुहृद्भिश्च सुहृत्तम॥ १२
भगवन्! आइये, चलें। मेरे परम हितैषी और सच्चे सुहृद् भगवन्! आप बलरामजी, ग्वालबालों तथा नन्दरायजी आदि आत्मीयोंके साथ चलकर हमारा घर सनाथ कीजिये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 387) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/41/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)