श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

ईदृशान्येव वासांसि नित्यं गिरिवनेचराः।

परिधत्त किमुद‍्वृत्ता राजद्रव्याण्यभीप्सथ॥ ३५

īdṛśānyeva vāsāṃsi nityaṃ girivanecarāḥ|

paridhatta kimudvṛttā rājadravyāṇyabhīpsatha|| 35

अर्थ

‘तुमलोग रहते हो सदा पहाड़ और जंगलोंमें। क्या वहाँ ऐसे ही वस्त्र पहनते हो? तुमलोग बहुत उद्दण्ड हो गये हो तभी तो ऐसी बढ़-बढ़कर बातें करते हो। अब तुम्हें राजाका धन लूटनेकी इच्छा हुई है॥ ३५॥

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