श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

पूतनानेन नीतान्तं चक्रवातश्‍च दानवः।

अर्जुनौ गुह्यकः केशी धेनुकोऽन्ये च तद्विधाः॥ २५

pūtanānena nītāntaṃ cakravātaśca dānavaḥ|

arjunau guhyakaḥ keśī dhenuko'nye ca tadvidhāḥ|| 25

अर्थ

इन्होंने ही पूतना, तृणावर्त, शंखचूड़, केशी और धेनुक आदिका तथा और भी दुष्ट दैत्योंका वध तथा यमलार्जुनका उद्धार किया है॥ २५॥

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