श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

बद‍्ध्वा परिकरं शौरिः समुह्य कुटिलालकान्।

उवाच हस्तिपं वाचा मेघनादगभीरया॥ ३

baddhvā parikaraṃ śauriḥ samuhya kuṭilālakān|

uvāca hastipaṃ vācā meghanādagabhīrayā|| 3

अर्थ

तब भगवान् श्रीकृष्णने अपनी कमर कस ली और घुँघराली अलकें समेट लीं तथा मेघके समान गम्भीर वाणीसे महावतको ललकारकर कहा॥ ३॥

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