॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.43.35
तस्माद् राज्ञः प्रियं यूयं वयं च करवाम हे।
भूतानि नः प्रसीदन्ति सर्वभूतमयो नृपः॥ ३५
tasmād rājñaḥ priyaṃ yūyaṃ vayaṃ ca karavāma he|
bhūtāni naḥ prasīdanti sarvabhūtamayo nṛpaḥ|| 35
अर्थ
इसलिये आओ, हम और तुम मिलकर महाराजको प्रसन्न करनेके लिये कुश्ती लड़ें। ऐसा करनेसे हमपर सभी प्राणी प्रसन्न होंगे, क्योंकि राजा सारी प्रजाका प्रतीक है’॥ ३५॥