इसलिये तुम दोनोंको हम-जैसे बलवानोंके साथ ही लड़ना चाहिये। इसमें अन्यायकी कोई बात नहीं है। इसलिये श्रीकृष्ण! तुम मुझपर अपना जोर आजमाओ और बलरामके साथ मुष्टिक लड़ेगा॥ ४०॥
तस्माद् भवद्भ्यां बलिभिर्योद्धव्यं नानयोऽत्र वै।
मयि विक्रम वार्ष्णेय बलेन सह मुष्टिकः॥ ४०
इसलिये तुम दोनोंको हम-जैसे बलवानोंके साथ ही लड़ना चाहिये। इसमें अन्यायकी कोई बात नहीं है। इसलिये श्रीकृष्ण! तुम मुझपर अपना जोर आजमाओ और बलरामके साथ मुष्टिक लड़ेगा॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 401) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/43/40/