भरतवंशशिरोमणे! जिस समय पुरवासिनी स्त्रियाँ इस प्रकार बातें कर रही थीं, उसी समय योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्णने मन-ही-मन शत्रुको मार डालनेका निश्चय किया॥ १७॥
एवं प्रभाषमाणासु स्त्रीषु योगेश्वरो हरिः।
शत्रुं हन्तुं मनश्चक्रे भगवान् भरतर्षभ॥ १७
भरतवंशशिरोमणे! जिस समय पुरवासिनी स्त्रियाँ इस प्रकार बातें कर रही थीं, उसी समय योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्णने मन-ही-मन शत्रुको मार डालनेका निश्चय किया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 404) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/17/