इसी प्रकार मुष्टिकने भी पहले बलरामजीको एक घूँसा मारा। इसपर बली बलरामजीने उसे बड़े जोरसे एक तमाचा जड़ दिया॥ २४॥
तथैव मुष्टिकः पूर्वं स्वमुष्ट्याभिहतेन वै।
बलभद्रेण बलिना तलेनाभिहतो भृशम्॥ २४
इसी प्रकार मुष्टिकने भी पहले बलरामजीको एक घूँसा मारा। इसपर बली बलरामजीने उसे बड़े जोरसे एक तमाचा जड़ दिया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 405) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/24/