श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

तथैव मुष्टिकः पूर्वं स्वमुष्ट्याभिहतेन वै।

बलभद्रेण बलिना तलेनाभिहतो भृशम्॥ २४

tathaiva muṣṭikaḥ pūrvaṃ svamuṣṭyābhihatena vai|

balabhadreṇa balinā talenābhihato bhṛśam|| 24

अर्थ

इसी प्रकार मुष्टिकने भी पहले बलरामजीको एक घूँसा मारा। इसपर बली बलरामजीने उसे बड़े जोरसे एक तमाचा जड़ दिया॥ २४॥

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