॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.44.28
चाणूरे मुष्टिके कूटे शले तोशलके हते।
शेषाः प्रदुद्रुवुर्मल्लाः सर्वे प्राणपरीप्सवः॥ २८
cāṇūre muṣṭike kūṭe śale tośalake hate|
śeṣāḥ pradudruvurmallāḥ sarve prāṇaparīpsavaḥ|| 28
अर्थ
जब चाणूर, मुष्टिक, कूट, शल और तोशल—ये पाँचों पहलवान मर चुके, तब जो बच रहे थे, वे अपने प्राण बचानेके लिये स्वयं वहाँसे भाग खड़े हुए॥ २८॥