श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

तस्यानुजा भ्रातरोऽष्टौ कंकन्यग्रोधकादयः।

अभ्यधावन्‍नभिक्रुद्धा भ्रातुर्निर्वेशकारिणः॥ ४०

tasyānujā bhrātaro'ṣṭau kaṃkanyagrodhakādayaḥ|

abhyadhāvannabhikruddhā bhrāturnirveśakāriṇaḥ|| 40

अर्थ

कंसके कंक और न्यग्रोध आदि आठ छोटे भाई थे। वे अपने बड़े भाईका बदला लेनेके लिये क्रोधसे आगबबूले होकर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामकी ओर दौड़े॥ ४०॥

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