यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण बड़े भाई बलरामजीके साथ अपने माँ-बापके पास जाकर आदरपूर्वक और विनयसे झुककर ‘मेरी अम्मा! मेरे पिताजी!’ इन शब्दोंसे उन्हें प्रसन्न करते हुए कहने लगे—॥ २॥
उवाच पितरावेत्य साग्रजः सात्वतर्षभः।
प्रश्रयावनतः प्रीणन्नम्ब तातेति सादरम्॥ २
यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण बड़े भाई बलरामजीके साथ अपने माँ-बापके पास जाकर आदरपूर्वक और विनयसे झुककर ‘मेरी अम्मा! मेरे पिताजी!’ इन शब्दोंसे उन्हें प्रसन्न करते हुए कहने लगे—॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 408) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/45/2/