श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

न लब्धो दैवहतयोर्वासो नौ भवदन्तिके।

यां बालाः पितृगेहस्था विन्दन्ते लालिता मुदम्॥ ४

na labdho daivahatayorvāso nau bhavadantike|

yāṃ bālāḥ pitṛgehasthā vindante lālitā mudam|| 4

अर्थ

दुर्दैववश हमलोगोंको आपके पास रहनेका सौभाग्य ही नहीं मिला। इसीसे बालकोंको माता-पिताके घरमें रहकर जो लाड़-प्यारका सुख मिलता है, वह हमें भी नहीं मिल सका॥ ४॥

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