श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

तथेति तेनोपानीतं गुरुपुत्रं यदूत्तमौ।

दत्त्वा स्वगुरवे भूयो वृणीष्वेति तमूचतुः॥ ४६

tatheti tenopānītaṃ guruputraṃ yadūttamau|

dattvā svagurave bhūyo vṛṇīṣveti tamūcatuḥ|| 46

अर्थ

यमराजने ‘जो आज्ञा’ कहकर भगवान्‌का आदेश स्वीकार किया और उनका गुरुपुत्र ला दिया। तब यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी उस बालकको लेकर उज्जैन लौट आये और उसे अपने गुरुदेवको सौंपकर कहा कि ‘आप और जो कुछ चाहें, माँग लें’॥ ४६॥

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