अकुर्वतोर्वां शुश्रूषां क्लिष्टयोर्दुर्हृदा भृशम्॥ ९
tat kṣantumarhathastāta mātarnau paratantrayoḥ|
akurvatorvāṃ śuśrūṣāṃ kliṣṭayordurhṛdā bhṛśam|| 9
अर्थ
मेरी माँ और मेरे पिताजी! आप दोनों हमें क्षमा करें। हाय! दुष्ट कंसने आपको इतने-इतने कष्ट दिये, परंतु हम परतन्त्र रहनेके कारण आपकी कोई सेवा-शुश्रूषा न कर सके’॥ ९॥
तत् क्षन्तुमर्हथस्तात मातर्नौ परतन्त्रयोः।
अकुर्वतोर्वां शुश्रूषां क्लिष्टयोर्दुर्हृदा भृशम्॥ ९
मेरी माँ और मेरे पिताजी! आप दोनों हमें क्षमा करें। हाय! दुष्ट कंसने आपको इतने-इतने कष्ट दिये, परंतु हम परतन्त्र रहनेके कारण आपकी कोई सेवा-शुश्रूषा न कर सके’॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 409) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/45/9/