श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

गायन्तीभिश्‍च कर्माणि शुभानि बलकृष्णयोः।

स्वलंकृताभिर्गोपीभिर्गोपैश्‍च सुविराजितम्॥ ११

gāyantībhiśca karmāṇi śubhāni balakṛṣṇayoḥ|

svalaṃkṛtābhirgopībhirgopaiśca suvirājitam|| 11

अर्थ

गोपी और गोप सुन्दर-सुन्दर वस्त्र तथा गहनोंसे सज-धजकर श्रीकृष्ण तथा बलरामजीके मंगलमय चरित्रोंका गान कर रहे थे और इस प्रकार व्रजकी शोभा और भी बढ़ गयी थी॥ ११॥

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