श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

भोजितं परमान्‍नेन संविष्टं कशिपौ सुखम्।

गतश्रमं पर्यपृच्छत् पादसंवाहनादिभिः॥ १५

bhojitaṃ paramānnena saṃviṣṭaṃ kaśipau sukham|

gataśramaṃ paryapṛcchat pādasaṃvāhanādibhiḥ|| 15

अर्थ

समयपर उत्तम अन्‍नका भोजन कराया और जब वे आरामसे पलँगपर बैठ गये, सेवकोंने पाँव दबाकर, पंखा झलकर उनकी थकावट दूर कर दी॥ १५॥

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