समयपर उत्तम अन्नका भोजन कराया और जब वे आरामसे पलँगपर बैठ गये, सेवकोंने पाँव दबाकर, पंखा झलकर उनकी थकावट दूर कर दी॥ १५॥
भोजितं परमान्नेन संविष्टं कशिपौ सुखम्।
गतश्रमं पर्यपृच्छत् पादसंवाहनादिभिः॥ १५
समयपर उत्तम अन्नका भोजन कराया और जब वे आरामसे पलँगपर बैठ गये, सेवकोंने पाँव दबाकर, पंखा झलकर उनकी थकावट दूर कर दी॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 416) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/46/15/