श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

स्मरतां कृष्णवीर्याणि लीलापांगनिरीक्षितम्।

हसितं भाषितं चाङ्ग सर्वा नः शिथिलाः क्रियाः॥ २१

smaratāṃ kṛṣṇavīryāṇi līlāpāṃganirīkṣitam|

hasitaṃ bhāṣitaṃ cāṅga sarvā naḥ śithilāḥ kriyāḥ|| 21

अर्थ

उद्धवजी! हम श्रीकृष्णके विचित्र चरित्र, उनकी विलासपूर्ण तिरछी चितवन, उन्मुक्त हास्य, मधुर भाषण आदिका स्मरण करते रहते हैं और उसमें इतने तन्मय रहते हैं कि अब हमसे कोई काम-काज नहीं हो पाता॥ २१॥

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