श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

मन्ये कृष्णं च रामं च प्राप्ताविह सुरोत्तमौ।

सुराणां महदर्थाय गर्गस्य वचनं यथा॥ २३

manye kṛṣṇaṃ ca rāmaṃ ca prāptāviha surottamau|

surāṇāṃ mahadarthāya gargasya vacanaṃ yathā|| 23

अर्थ

इसमें सन्देह नहीं कि मैं श्रीकृष्ण और बलरामको देवशिरोमणि मानता हूँ और यह भी मानता हूँ कि वे देवताओंका कोई बहुत बड़ा प्रयोजन सिद्ध करनेके लिये यहाँ आये हुए हैं। स्वयं भगवान् गर्गाचार्यजीने मुझसे ऐसा ही कहा था॥ २३॥

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