उन्होंने तीन ताल लंबे और अत्यन्त दृढ़ धनुषको वैसे ही तोड़ डाला, जैसे कोई हाथी किसी छड़ीको तोड़ डाले। हमारे प्यारे श्रीकृष्णने एक हाथसे सात दिनोंतक गिरिराजको उठाये रखा था॥ २५॥
तालत्रयं महासारं धनुर्यष्टिमिवेभराट्।
बभंजैकेन हस्तेन सप्ताहमदधाद् गिरिम्॥ २५
उन्होंने तीन ताल लंबे और अत्यन्त दृढ़ धनुषको वैसे ही तोड़ डाला, जैसे कोई हाथी किसी छड़ीको तोड़ डाले। हमारे प्यारे श्रीकृष्णने एक हाथसे सात दिनोंतक गिरिराजको उठाये रखा था॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 417) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/46/25/