अक्रूरजीने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीको नमस्कार किया तथा उद्धवजीके साथ उन दोनों भाइयोंने भी उन्हें नमस्कार किया। जब सब लोग आरामसे आसनोंपर बैठ गये, तब अक्रूरजी उन लोगोंकी विधिवत् पूजा करने लगे॥ १४॥✎ 1680
ननाम कृष्णं रामं च स तैरप्यभिवादितः।
पूजयामास विधिवत् कृतासनपरिग्रहान्॥ १४
अक्रूरजीने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीको नमस्कार किया तथा उद्धवजीके साथ उन दोनों भाइयोंने भी उन्हें नमस्कार किया। जब सब लोग आरामसे आसनोंपर बैठ गये, तब अक्रूरजी उन लोगोंकी विधिवत् पूजा करने लगे॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.48.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 437) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/48/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)