॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.49.2
सहपुत्रं च बाह्लीकं भारद्वाजं सगौतमम्।
कर्णं सुयोधनं द्रौणिं पाण्डवान् सुहृदोऽपरान्॥ २
sahaputraṃ ca bāhlīkaṃ bhāradvājaṃ sagautamam|
karṇaṃ suyodhanaṃ drauṇiṃ pāṇḍavān suhṛdo'parān|| 2
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्के आज्ञानुसार अक्रूरजी हस्तिनापुर गये। वहाँकी एक-एक वस्तुपर पुरुवंशी नरपतियोंकी अमरकीर्तिकी छाप लग रही है। वे वहाँ पहले धृतराष्ट्र, भीष्म, विदुर, कुन्ती, बाह्लीक और उनके पुत्र सोमदत्त, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, दुर्योधन, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, युधिष्ठिर आदि पाँचों पाण्डव तथा अन्यान्य इष्ट-मित्रोंसे मिले॥ १-२॥✎ 1435 1436