॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.49.28
ईश्वरस्य विधिं को नु विधुनोत्यन्यथा पुमान्।
भूमेर्भारावताराय योऽवतीर्णो यदोः कुले॥ २८
īśvarasya vidhiṃ ko nu vidhunotyanyathā pumān|
bhūmerbhārāvatārāya yo'vatīrṇo yadoḥ kule|| 28
अर्थ
अक्रूरजी! सुना है कि सर्वशक्तिमान् भगवान् पृथ्वीका भार उतारनेके लिये यदुकुलमें अवतीर्ण हुए हैं। ऐसा कौन पुरुष है, जो उनके विधानमें उलट-फेर कर सके। उनकी जैसी इच्छा होगी, वही होगा॥ २८॥