श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब वसुदेवजीने इस प्रकार कहा, तब नन्द आदि गोपोंने उनसे अनुमति ले, बैलोंसे जुते हुए छकड़ोंपर सवार होकर गोकुलकी यात्रा की॥ ३२॥
इति नन्दादयो गोपाः प्रोक्तास्ते शौरिणा ययुः।
अनोभिरनडुद्युक्तैस्तमनुज्ञाप्य गोकुलम्॥ ३२
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब वसुदेवजीने इस प्रकार कहा, तब नन्द आदि गोपोंने उनसे अनुमति ले, बैलोंसे जुते हुए छकड़ोंपर सवार होकर गोकुलकी यात्रा की॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 154) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/5/32/