भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही मनुष्यका-सा वेष धारण किये हुए हैं। अब उन्होंने विचार किया कि मेरे अवतारका क्या प्रयोजन है और इस समय इस स्थानपर मुझे क्या करना चाहिये॥ ६॥✎ 1682
चिन्तयामास भगवान् हरिः कारणमानुषः।
तद्देशकालानुगुणं स्वावतारप्रयोजनम्॥ ६
भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही मनुष्यका-सा वेष धारण किये हुए हैं। अब उन्होंने विचार किया कि मेरे अवतारका क्या प्रयोजन है और इस समय इस स्थानपर मुझे क्या करना चाहिये॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 445) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/50/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)