॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.50.7
हनिष्यामि बलं ह्येतद् भुवि भारं समाहितम्।
मागधेन समानीतं वश्यानां सर्वभूभुजाम्॥ ७
haniṣyāmi balaṃ hyetad bhuvi bhāraṃ samāhitam|
māgadhena samānītaṃ vaśyānāṃ sarvabhūbhujām|| 7
अर्थ
उन्होंने सोचा यह बड़ा अच्छा हुआ कि मगधराज जरासन्धने अपने अधीनस्थ नरपतियोंकी पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथियोंसे युक्त कई अक्षौहिणी सेना इकट्ठी कर ली है। यह सब तो पृथ्वीका भार ही जुटकर मेरे पास आ पहुँचा है। मैं इसका नाश करूँगा। परन्तु अभी मगधराज जरासन्धको नहीं मारना चाहिये। क्योंकि वह जीवित रहेगा तो फिरसे असुरोंकी बहुत-सी सेना इकट्ठी कर लायेगा॥ ७-८॥✎ 1682