श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

स इक्ष्वाकुकुले जातो मान्धातृतनयो महान्।

मुचुकुन्द इति ख्यातो ब्रह्मण्यः सत्यसंगरः॥ १४

sa ikṣvākukule jāto māndhātṛtanayo mahān|

mucukunda iti khyāto brahmaṇyaḥ satyasaṃgaraḥ|| 14

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! वे इक्ष्वाकुवंशी महाराजा मान्धाताके पुत्र राजा मुचुकुन्द थे। वे ब्राह्मणोंके परम भक्त, सत्यप्रतिज्ञ, संग्रामविजयी और महापुरुष थे॥ १४॥

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