श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सुता महिष्यो भवतो ज्ञातयोऽमात्यमन्त्रिणः।

प्रजाश्‍च तुल्यकालीया नाधुना सन्ति कालिताः॥ १८

sutā mahiṣyo bhavato jñātayo'mātyamantriṇaḥ|

prajāśca tulyakālīyā nādhunā santi kālitāḥ|| 18

अर्थ

अब आपके पुत्र, रानियाँ, बन्धु-बान्धव और अमात्य-मन्त्री तथा आपके समयकी प्रजामेंसे कोई नहीं रहा है। सब-के-सब कालके गालमें चले गये॥ १८॥

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