श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

कालो बलीयान् बलिनां भगवानीश्‍वरोऽव्ययः।

प्रजाः कालयते क्रीडन् पशुपालो यथा पशून्॥ १९

kālo balīyān balināṃ bhagavānīśvaro'vyayaḥ|

prajāḥ kālayate krīḍan paśupālo yathā paśūn|| 19

अर्थ

काल समस्त बलवानोंसे भी बलवान् है। वह स्वयं परम समर्थ अविनाशी और भगवत्स्वरूप है। जैसे ग्वाले पशुओंको अपने वशमें रखते हैं, वैसे ही वह खेल-खेलमें सारी प्रजाको अपने अधीन रखता है॥ १९॥

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