परम यशस्वी राजा मुचुकुन्दने देवताओंके इस प्रकार कहनेपर उनकी वन्दना की और बहुत थके होनेके कारण निद्राका ही वर माँगा तथा उनसे वर पाकर वे नींदसे भरकर पर्वतकी गुफामें जा सोये॥ २१॥
एवमुक्तः स वै देवानभिवन्द्य महायशाः।
अशयिष्ट गुहाविष्टो निद्रया देवदत्तया॥ २१
परम यशस्वी राजा मुचुकुन्दने देवताओंके इस प्रकार कहनेपर उनकी वन्दना की और बहुत थके होनेके कारण निद्राका ही वर माँगा तथा उनसे वर पाकर वे नींदसे भरकर पर्वतकी गुफामें जा सोये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 455) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/51/21/