श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स्वापं यातं यस्तु मध्ये बोधयेत्त्वामचेतनः।

स त्वया दृष्टमात्रस्तु भस्मीभवतु तत्क्षणात्॥ २२

svāpaṃ yātaṃ yastu madhye bodhayettvāmacetanaḥ|

sa tvayā dṛṣṭamātrastu bhasmībhavatu tatkṣaṇāt|| 22

अर्थ

उस समय देवताओंने कह दिया था कि ‘राजन्! सोते समय यदि आपको कोई मूर्ख बीचमें ही जगा देगा तो वह आपकी दृष्टि पड़ते ही उसी क्षण भस्म हो जायगा’॥ २२॥

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