श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

मन्ये त्वां देवदेवानां त्रयाणां पुरुषर्षभम्।

यद् बाधसे गुहाध्वान्तं प्रदीपः प्रभया यथा॥ ३०

manye tvāṃ devadevānāṃ trayāṇāṃ puruṣarṣabham|

yad bādhase guhādhvāntaṃ pradīpaḥ prabhayā yathā|| 30

अर्थ

मैं तो ऐसा समझता हूँ कि आप देवताओंके आराध्यदेव ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर—इन तीनोंमेंसे पुरुषोत्तम भगवान् नारायण ही हैं। क्योंकि जैसे श्रेष्ठ दीपक अँधेरेको दूर कर देता है, वैसे ही आप अपनी अंगकान्तिसे इस गुफाका अँधेरा भगा रहे हैं॥ ३०॥

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