महाभाग! आप समस्त प्राणियोंके माननीय हैं। आपके परम दिव्य और असह्य तेजसे मेरी शक्ति खो गयी है। मैं आपको बहुत देरतक देख भी नहीं सकता॥ ३५॥
तेजसा तेऽविषह्येण भूरि द्रष्टुं न शक्नुमः।
हतौजसो महाभाग माननीयोऽसि देहिनाम्॥ ३५
महाभाग! आप समस्त प्राणियोंके माननीय हैं। आपके परम दिव्य और असह्य तेजसे मेरी शक्ति खो गयी है। मैं आपको बहुत देरतक देख भी नहीं सकता॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 456) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/51/35/