जब राजा मुचुकुन्दने इस प्रकार कहा, तब समस्त प्राणियोंके जीवनदाता भगवान् श्रीकृष्णने हँसते हुए मेघध्वनिके समान गम्भीर वाणीसे कहा—॥ ३६॥
एवं सम्भाषितो राज्ञा भगवान् भूतभावनः।
प्रत्याह प्रहसन् वाण्या मेघनादगभीरया॥ ३६
जब राजा मुचुकुन्दने इस प्रकार कहा, तब समस्त प्राणियोंके जीवनदाता भगवान् श्रीकृष्णने हँसते हुए मेघध्वनिके समान गम्भीर वाणीसे कहा—॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 456) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/51/36/